सुना है मुझ से बिछड़ के, तू भी तो तन्हा बहुत है
एक मुलाकात को राज़ी हुए, जब हमने कहा बहुत है
तूने तो फिर भी दो-चार पल की मोहलत दे दी हमें
एक मुलाकात को राज़ी हुए, जब हमने कहा बहुत है
तूने तो फिर भी दो-चार पल की मोहलत दे दी हमें
तुझे दीवाना बनाने को,मेरी खातिर एक लम्हा बहुत है
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