वो जिसका हर नींद में नाम-ओ-निशाँ होता है
एक ख्वाब है जो अक्सर होश-ऐ-जवाँ होता है
ना दे शुरूर मुझे इस पैमाने का अब और साकी
छूके लब गुजरे तो फिर वही हाल-ऐ-बयाँ होता है
नजदीकियां बढाने के बहाने तब होते हैं जलूस
कोई फासला जब-जब कदम-ऐ-दरमयां होता है
चेहरे की लकीरों तक को हर्फ़ दे डाले "तीर्थराज"
औ' उनकी खातिर ये बस मौज-ऐ-दास्ताँ होता है
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