Monday, February 27, 2012

'अक्स' की शाम


रिश्ते बहुत निभाए हमने पे तुम जैसा हमराही कोई मिला नहीं
छोटे को फकत उस्ताद कह दे,ऐसा बड़ा भाई कोई मिला नहीं 

कुछ हाफिज़-ऐ-सुखन मिले थे राह-ऐ-गुज़र में इमाम बने हुए  
शागिर्द हम आप जिसके हो जायें वो हातिम ताई कोई मिला नहीं 

सिफत एक ढूंढ रहा था बड़ी मुददत से तेरी तारीफ में लेकिन
नज्में तेरी ही मिलीं दो-चार खय्याम-ऐ-रुबाई कोई मिला नहीं 

तकल्लुस-ऐ-तीर्थराज की परवरिश तुम यूँ ही करते रहना "अक्स"
कहीं तुझसे बिछड़ के हम ना कह दें,'ऐसा हरजाई कोई मिला नहीं"


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