रक्त की पुकार है
रुको न तुम झुको न तुम
यही समर की ललकार है
मुट्ठियों को भींचकर
शोणित कणों को त्वरित करो
अचल हो,विजयी हो
पर अब तुम अजेय बनो
बाल्व्य का पहिया
यूँही धिल्मिल लुढ़क जायेगा
तुम नहीं तो और कोई
शिखर तक पहुँच जायेगा
चाह यह रखो
है गगन तुम्हे भेदना
नहीं केवल सितारों की
टिम्तिमो से खेलना
achcha hai keep it up :)
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