बड़ी अनोखी कृति है मानव| बालों के झुरमुट से लेकर गद्देदार तलवों तक,बड़ी बेतरतीबी दिखलाई है विधाता ने| कहीं उभरी नाक,तो कहीं कोटरों में धंसी दो-दो आँखें|पंखे की तरह छोटे-छोटे दो कान और हाथों में पांच-पांच उँगलियाँ|पर सबों में असमानता है| दो पैर-पर दोनों,असमानता में छुटपन लिए सम्पूर्ण शरीर का भार उठाने में सक्षम| पर मित्रो,चितेरे अक्सर कहा करते हैं,"बेतरतीबी में भी सुन्दरता होती है"| तभी तो हम कहलाते हैं,'विधाता की सर्वश्रेष्ठ कृति'|अरे! असमानता में भी सुन्दरता| है न विचित्र बात|
awesome lines and concept!!!
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