Tuesday, September 11, 2012

दीवारों की कैद में किसी दिन ये मकाँ रोयेगा
कब गुल-ऐ-रंज से मुकम्मल गुलिस्ताँ रोयेगा

सलाखों में जब्त है हर तरफ अवाम 'तीर्थराज'
अब जम्हूरियत की दहलीज पे हिन्दोस्ताँ रोयेगा

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