Sunday, April 17, 2011

ग़ज़ल


कभी जवाब लो मेरा, तो वो सवाल भी लेते आना
जो मिलने आऊं तुमसे मैं,वो रूमाल भी लेते आना

ये माना दोस्त ही थे हम,एह-दे-वफ़ा ना कर सके 
बेवफाई का जो रह गया मलाल,वो मलाल भी लेते आना

सरगोशियों में अपनी कुछ  सोहबतें की थी हमने
तेरे सिरहाने हैं रखे, वो ख्याल भी लेते आना

नज़र आज भी झुकती है तेरी, हर दीदार पे मेरे
जेहन में है जो अब भी,वो सूरत-ए-इकबाल भी लेते आना

ना ला सको अगर कुछ भी तुम तो "तीर्थराज"
कमसकम शहर में उठे चर्चों के वो बवाल भी लेते आना ||


  


  








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