सुबह-सुबह नींद मेरी कह रही थी मुझसे
"रात करवटें बहुत मुस्कुरा कर ली तुमने"
भीगे हुए तकिये को हमने चुपचाप पलट दिया.||
क्यूँ जलाकर शौक से..
रिमझिम की दुआ करते हो अब ??
मरहम जख्म मिटाते हैं,दाग नहीं.||
माँ ने आँगन से आवाज़ लगायी..
"लाओ तुम्हारे कुरते के दाग साफ़ कर दूं"
हमने सहजता से कहा,"दामन खुरच रहे हैं अभी".||
तमन्नाएं आज फिर कह रही थीं हंसकर
तुम्हे अब भी उस नज़र की आस है ??
दो बूँद गिरते ही, आँखें मूँद ली हमने.||
एक से बढ़कर एक क्षणिकाएं - वाह वाह - लाजवाब
ReplyDeleteइस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्लॉग जगत में स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
ReplyDelete" भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप को तथा आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामना. यहाँ भी आयें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो फालोवर अवश्य बने .साथ ही अपने सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ . हमारा पता है ... www.upkhabar.in
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