Saturday, February 23, 2013


मियाँ सुपुर्द-ए-ख़ाक की जैसी भी हो तरकीब, बता देना  
जहमत हो तो दफन कर लेना, वगरना यूँ ही जला देना 

आखिरी ख्वाहिश में 'शहजाद', इतनी सी रहमत अता करना  
चार हसीनो से जनाज़ा उठवाना, दो शेर 'ग़ालिब' के सुना देना  

Wednesday, February 20, 2013

ग़ज़ल

कलम से खींच कर लकीरें कलाकारी पर उतर आऊंगा 
ऐ मोहब्बत दूर रह मुझसे, मैं शायरी पर उतर आऊंगा

जब तलक हासिल हूँ तुम्हें अपनी तकदीर पे खैर करो
गर कीमत लगाने बैठोगे, मैं खुद्दारी पर उतर आऊंगा  

ये हुनर शौकियाना है, कभी जिंदगी नहीं देगा 'शहजाद' 
जो भूखे पेट रहना पड़ा, तो ख़ुदकुशी पर उतर आऊंगा  


Saturday, February 09, 2013

उनकी शक्लों पे हंसी फीकी पड़ जाती है सामने आते हुए 
जिनकी सोहबत में एक यार नहीं, दो-चार तरफदार होते हैं 

Tuesday, January 29, 2013

ग़ज़ल

मौसमी हवाओं में रंगत नयी-नयी सी है 
वो आ रहा शहर में खबर उड़ी-उड़ी सी है

कल परिंदों ने कहा, 'एक तुम ही नहीं हो घायल'
आह हर किसी के दिल में यहाँ दबी-दबी सी है 

हाय कि तेरा शर्मना वो धूप की अदाओं जैसा  
लगता है जैसे सेहरा की नज़र झुकी-झुकी सी है

रात तुम ख्वाब में क्या आये बवाल हो गया 
माँ सुबह कह रही थी कि सूरत खिली-खिली सी है 

हुई मुद्दत राह तके अब आ भी जाओ 'शहजाद'
घड़ी दर घड़ी वक़्त-ओ-मुझमे ठनी-ठनी सी है 


यूँही नहीं मोहब्बत ने उससे बेदिली की होगी
जरूर किसी शायर से उसने दिल्लगी की होगी 

चील-कौवे भी देने लगे हैं उसके आशियाने पे दस्तक
जाने कितने इश्क्जादों ने वहां ख़ुदकुशी की होगी

    

Friday, January 25, 2013

26 जनवरी

26 जनवरी..!!! 
हर साल की तरह फिर से आ गयी 
लेकर फिर वही तिरंगों के दौर
वही लता की आवाज़ में गूंजता संगीत 
और वही सुबह-सुबह बच्चों में दिखती उमंग, 
कामकाजी लोगों के लिए छुट्टी का दिन 
और युवाओं के लिए 'Dry Day'
'पाँच' पहलुओं में समेट  कर रख दे कोई 
इस तारीख से जुडी हरकतें, 
और भी कुछ सोच लें, गर छूट गया हो तो।
लाजमी भी है, 'पाँच' पहलुओं पर ही तो बनी थी ये तारीख 
'Sovereign' 'Socialist' 'Secular', 'Democratic' और 'Republic'
पर ये 'पाँच'  पहलू आपको 26 जनवरी में नहीं मिलेंगे 
इसके लिए जरा जहमत उठाइये,
"गणतंत्र दिवस' मनाइये। 

Sunday, January 06, 2013

सिखलाते हो सलीका हर नुक्स निकाल के
अब थोडा तो छेड़-छाड़ करो, मैं नशे में हूँ