Monday, November 05, 2012

भरी जम्हूरियत में कभी ऐसी भी झांकी होगी 
किसी दिन हिन्दोस्ताँ को चौराहे पे फांसी होगी 

नौकरशाहों के हाथ बंधे होंगे कागज़-ओ-कलम लिए
मुहर अंगूठे का हर तरफ सियासत लगाती होगी  


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