Thursday, July 19, 2012


इत्तेफाकन अब्बा की मैय्यत उसके करीब ना थी
उस रोज भी कोई बात दिन में अजीब ना थी....

वो डिबिया जलाकर किताबें चाटता रहा रात भर
शाम के निवाले में जिसको दो रोटी नसीब ना थी 


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