Wednesday, September 28, 2011

ग़ज़ल

सफेदपोशों को तुम क्या सियासत सिखलाओगे भला
राह चलते इनकी टोपियाँ क्यूँ उछलवाओगे भला

इस घर में पहले ही सौदागर बहुत से हैं मौजूद
फिर उन बाज़ारों में क्यूँ तुम जाओगे भला

शहर का हर शख्स मजमे में शामिल है 'तीर्थराज'
तुम आखिर किस-किस पे उंगलियाँ उठाओगे भला   

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