ये इश्क नहीं 'फ़राज़' हमें तो चाहने की आदत है
सितम सहकर भी उनके,मुस्कुराने की आदत है
जिन्हें देखना है वो शौक से देखें चाँद को
हमें तो यूँही हर रात जागने की आदत है
महफ़िल में मैंने इल्जाम लिया तो क्या किया
उसे तो वैसे भी उँगलियाँ उठाने की आदत है
मोहल्ले में फिर कभी तुम बेपर्दा ना निकलना
गली के बूढों को भी सीटियाँ बजाने की आदत है
'तीर्थराज' क्यूँ बात-बात पे खफा हो जाते हो तुम
इन्सां हैं हम भी ,ये खताएं करने की आदत है
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