बातें अब घर-घर होने लगीं थी हमारी आशिकी की
उसकी बदनामियों के डर से उस गली में जाना छोड़ दिया
लोग राह चलते भी कहने लगे थे,"क्या बात है मियां"
सो उसने नकाब के पर्दों में भी मुस्कुराना छोड़ दिया
महफिलों में मिलती नजर तो भी जमाने को ऐतराज़ था
हमने भी खफा होकर हसीनो से नजरें मिलाना छोड़ दिया
एहसास है बस एक माँ को मेरी चाहत की शिद्दत का
वैसे भी औरों को हमने कब का समझाना छोड़ दिया
मुशायरों को डर था मैं गैरमौजूद ना हो जाऊं कहीं
कहने लगे थे कुछ लोग,'तीर्थराज' ने गजलें बनाना छोड़ दिया
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