Friday, April 19, 2013

चंद मुलाकातों में ही तेरी रग-रग को भाँप रक्खा है 
अपनी शख्सियत को तूने इस चेहरे से झाँप रक्खा है 

वो तो एक ओहदे की तर्ज़ पर खामोश बैठे हैं हम 
वरना तेरी हैसियत का कद हथेली से माप रक्खा है 

Monday, April 15, 2013


यूँ बे-पैरहन ना उतरा करो हमाम मे शहज़ादी
अंगड़ाईयाँ भर-भर के आब भंवर हो जाएगा

Tuesday, April 02, 2013

हमने करीने से सजा कर छोड़ रक्खा था उनकी यादों को
ये बदहवास हवा एक झोंके में सब को जिन्दा कर गयी

Saturday, March 02, 2013

नेकियाँ खरीदीं हैं हमने अपनी शोहरतें गिरवी रख कर 
कभी फुर्सत में मिलना जिंदगी, तेरा भी हिसाब करेंगे 


Wednesday, February 27, 2013

वो जो हर रोज़ लौट जाता है मेरे ख्वाब की दहलीज से 
उससे कहो, "पाजेब की आहट से मुझे जगाया ना करे"

Saturday, February 23, 2013


मियाँ सुपुर्द-ए-ख़ाक की जैसी भी हो तरकीब, बता देना  
जहमत हो तो दफन कर लेना, वगरना यूँ ही जला देना 

आखिरी ख्वाहिश में 'शहजाद', इतनी सी रहमत अता करना  
चार हसीनो से जनाज़ा उठवाना, दो शेर 'ग़ालिब' के सुना देना  

Wednesday, February 20, 2013

ग़ज़ल

कलम से खींच कर लकीरें कलाकारी पर उतर आऊंगा 
ऐ मोहब्बत दूर रह मुझसे, मैं शायरी पर उतर आऊंगा

जब तलक हासिल हूँ तुम्हें अपनी तकदीर पे खैर करो
गर कीमत लगाने बैठोगे, मैं खुद्दारी पर उतर आऊंगा  

ये हुनर शौकियाना है, कभी जिंदगी नहीं देगा 'शहजाद' 
जो भूखे पेट रहना पड़ा, तो ख़ुदकुशी पर उतर आऊंगा