Monday, December 26, 2011

उससे कह दो कि जाके साँस-ए-सुकूँ ले ले
हमें अब और बर्बाद होने का शौक नहीं 

Thursday, November 24, 2011

बलाएं ऐसी हैं कुछ जिन्हें चाहकर भी छुपाया नहीं जाता
गुफ्तगू इशारे करते हो जहाँ,कलाम फ़रमाया नहीं जाता

कागज़ पे लिखी ये चंद आयतें, इमाम की जागीरें होंगी 
इश्क वो हुनर है जो किसी मदरसे में सिखाया नहीं जाता 


शमा की हरकतों का हाल-ए-बयाँ देखो कभी
सुर्ख रुखसार की शर्म-ओ-हया क्या चीज है 

जाँ देने की खातिर मुकम्मल वजह भी तो हो
दो-चार हसीं चेहरों की शोख-ए-अदा क्या चीज है 

Saturday, November 19, 2011

महबूब से बेशक,बड़ी कोई चाहत नहीं 
इश्क है आखिर हुस्न-ए-तिजारत नहीं 

खुदा की खातिर इन्सां को इन्सां रहने दो 
मोहब्बत करो "तीर्थराज" इबादत नहीं 

Friday, November 18, 2011

बवंडरों के खौफ का सबब ये जलजले नहीं होते
तितली की ताकत में आसमाँ के हौसले नहीं होते 

लकीरें बदल डालो "तीर्थराज" गर बगावत करती हों
बगैर तेरी इजाजत,कभी मुकद्दर के फैसले नहीं होते 

Thursday, November 17, 2011

तू मुझे भुलाने की तरकीबें ना इजाद कर "तीर्थराज"
खामखाँ इस बहाने तुम्हे हमारा ख्याल आता होगा 

Wednesday, November 16, 2011

ग़ज़ल

झूठे इशारों पर भी जो मुस्कुराने लगते हैं
महफ़िल में वही चेहरे कुछ पहचाने लगते हैं 

तौफीक से अपनी,ये हया पे परदे डाल कर
हुस्न-ए-हराम का घूंघट सरकाने लगते हैं 

इनकी मोहसिन मिजाजी का है अंदाज अलग 
काबे के जलसे में भी सिक्के बरसाने लगते हैं 

चेहरे हिजाबों में रख कर पेश-ए-नजर कीजिये
त्योरियों की हरकतें भी इन्हें अफ़साने लगते हैं 

होश-ओ-खबर में तालीम-ए-इश्क दे रहे हैं "तीर्थराज"
जिस हुनर की खातिर वायज को पूरे मैखाने लगते हैं