तीर्थराज रासो
I WAS AN ATHEIST,TILL I BELIEVED I WAS GOD
Wednesday, November 07, 2012
किस गुरूर-ए-तर्ज़ पे 'शहजाद' मेरी तौहीन करता है
हम शख्सियत रखते हैं, वो केवल हुस्न रखता है
Monday, November 05, 2012
भरी जम्हूरियत में कभी ऐसी भी झांकी होगी
किसी दिन हिन्दोस्ताँ को चौराहे पे फांसी होगी
नौकरशाहों के हाथ बंधे होंगे कागज़-ओ-कलम लिए
मुहर अंगूठे का हर तरफ सियासत लगाती होगी
Wednesday, October 31, 2012
मैं खुली आँखों से ही देखा करता हूँ सपने 'शहजाद'
ये वो ख्वाब नहीं, जो नींद उचट जाने के मोहताज हों
Tuesday, October 30, 2012
मत सेंकिए ख्वाब यहाँ सिक्के की आँच पर
ज़माने में भी हर शोहरत बिकाऊ नहीं होती
Saturday, October 27, 2012
मैं दीवारों से पूछ लेता हूँ बगल के कमरे का हाल
मकाँ में एक वही हैं जिनसे किसी को रंजिश नहीं
Thursday, October 18, 2012
खींचते हो कश पे कश शेख-मिजाजी से
जिंदगी तेरी, धुंए में उडी जाती है लेकिन
Monday, October 15, 2012
मिटा दो हर्फ़-हर्फ़ उनके नया पैगाम लिख डालो
हथेली की लकीरों से, खूनी अंजाम लिख डालो
बड़ी जल्दी में हैं तारीखें, सेहर तक बदल जाएँगी
गुज़रते हुए हर एक मंजर पे अपना नाम लिख डालो
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