तीर्थराज रासो
I WAS AN ATHEIST,TILL I BELIEVED I WAS GOD
Friday, January 27, 2012
चलो तुमने कहा तो फिर स्याही लगायी है उँगलियों पे
एक गुज़ारिश है कि कलम चलाने की वजह भी दे दो
Wednesday, January 25, 2012
गणतंत्रता की वेदी पर जो प्रसून चढ़ाये जाते हैं
नहीं नीर सिंचित अंतर के रक्त जलाये जाते हैं
शासन-ऐ-हिंद के परदे अब चीथड़ों में हैं
आवाम रही हुंकार,हम आते हैं-हम आते हैं
यूँ बार-बार अलफ़ाज़ जड़ने को मजबूर ना कर "साकी"
नशे की दुकानें उजड़ जायेंगी,मेरी एक ग़ज़ल के साथ
Monday, January 23, 2012
उसका चेहरा नहीं,हया की एक "दीवार" है
मैं कुछ "ईंटें" बस निकाल लेना चाहता हूँ
Wednesday, January 04, 2012
बहुत हुई ये मस्तियाँ,ये कारस्तानी,ये बेसबब मुलाकातें
जिंदगी तरस रही है,एक नजर उसे भी मिल लिया करो
Monday, January 02, 2012
सपनो का वो बसा-बसाया गुलशन कहीं खो गया है
अरमानो से सींच के रक्खा चमन कहीं खो गया है
मोहब्बत जिस शख्स से थी बेशुमार अब नहीं मिलता
"तीर्थराज" के चर्चों में ये "संगम" कहीं खो गया है
Monday, December 26, 2011
उससे कह दो कि जाके साँस-ए-सुकूँ ले ले
हमें अब और बर्बाद होने का शौक नहीं
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